बिहार राजव्यवस्था
बिहार कार्यपालिका
राज्य की कार्यपालिका केंद्र की कार्यपालिका की तरह ही कार्य करती है तथा इसका प्रभाव राज्यपाल होता है।
राज्य की राजधानी – पटना से ही राज्य की कार्यपालिका राज्य का संचालन करती है।
राज्य की कार्यपालिका के राजनीतिक प्रमुख मुख्यमंत्री होते हैं। वे तथा उनकी मुख्यमंत्री संयुक्त रूप से राज्य विधानमण्डल के प्रति उत्तरदायी होते हैं। इनके सहायतार्थ विशेष सचिव, उप-सचिव, अन्य उच्चधिकारी तथा कर्मचारी होते हैं।
सचिवालय
राज्य के सचिवालय के प्रायः सभी विभागों में उनके प्रधान सचिवों के नियंत्रणाधीन विभागाध्यक्ष अथवा कार्यालयाध्यक्ष होते हैं। शासन की कार्यपालिका शक्ति के रूप में कार्य करते हुए समस्त आदेश या समस्त कार्य मुख्यतः हिंदी भाषा एवं देवनागरी लिपि में सपन्न होता है
और शासनादेशों पर सचिव अथवा उनके द्वारा अधिकार प्राप्त अनुसचिव पद तक के अधिकारी हस्ताक्षर करते हैं। सचिवालय के प्रधान सचिव, विशेष सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव आदि पदों पर सामान्यतः भारतीय तथा बिहार प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारी नियुक्त किये जाते हैं।
मंत्रिपरिषद
राज्यपाल को प्रशासन में सहायता एवं सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होती है, जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होता है। सैद्धांतिक दृष्टि से मंत्रिपरिषद एक परमर्शदात्रि समिति है, किन्तु व्यवहार में यह राज्य की वास्तविक कार्यपालिका है,
जिसके परामर्श के अनुसार राज्यपाल कार्य करने को बाध्य होता है। विधि, वित्तीय व अर्थ संबंधी सभी मामलों का निर्धारण मंत्रिपरिषद ही करती है।
मुख्यमंत्री
विधानसभा के सदस्य कई राजनीतिक दलों में बंटे होते हैं, जिस दल का बहुमत होता है उसी दल का नेता मुख्यमंत्री होता है। यदि किसी दल का बहुमत नहीं हुआ तो कई दलों के पारस्परिक तालमेल से गठबंधन सरकार या मंत्रिपरिषद का गठन किया जाता है।
मंत्रिपरिषद में प्रधानता मुख्यमंत्री की होती है। मुख्यमंत्री का चुनाव उसके दल अथवा गठबंधन के सहयोगी दलों के सदस्य करते हैं।
किन्तु मख्यमंत्री के रूप में किसी व्यक्ति की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा होती है। मुख्यमंत्री राज्यपाल व मंत्रिमंडल के बीच कड़ी का कार्य करता है।
शासन संबंधी निर्णयों, मंत्रियों व पदाधिकारियों की नियुक्ति तथा विधि निर्माण कार्य में मुख्यमंत्री की भूमिका अहम होती है।
न्यायपालिका
न्यायपालिका सरकार का तीसरा प्रमुख अंग होता है। नागरिक जीवन में शासन, अनुचित हस्तक्षेप न करे और एक नागरिक दूसरे नागरिक के साथ ठीक व्यवहार करे,
इसकी देखभाल के लिए भारतीय संविधान के उपबंधों के अधीन बिहार में भी स्वतंर न्यायपालिका की व्यवस्था की गई है।
राज्य में सबसे ऊँची अदालत पटना उच्च न्यायालय है, जिसकी स्थापना सन 1916 ई. में हुई थी। छोटी अदालतों के अधिकारी राज्य सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में अवकाश ग्रहण करते है।
🧡🤍💚
